वाराणसी। भ्रष्टाचारियों का एक गिरोह बीएचयू को मनमाने ढंग से चला रहा है, भ्रष्टाचारियों को यहां लूट की छूट है और काम करने वालों के लिए सूली का इंतजाम। बीएचयू के इतिहास में मैंने पहली एंजियोप्लास्टी की ये मेरी पहली ग़लती की थी। मैंने मरीजों के हितों को प्राथमिकता दी उनके लिए लगातार काम किया यही मेरा अपराध है। बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल के हृदय रोग विभाग के प्रो ओमशंकर ने बुधवार को पत्रकार वार्ता के दौरान उक्त बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि बीते बीस सालों से बीएचयू प्रशासन एक ऐसा कानून जो बीएचयू में लागू है ही नहीं उसे जरिया बनाकर सैकड़ों शिक्षकों का उत्पीड़न, निलंबन करता रहा। अब जब आरटीआई के जरिए इस बात का खुलासा तो बीएचयू प्रशासन मेरे खिलाफ जांच का हवाला दे रहा है। बताते चलें की सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रो. ओमशंकर ने बीएचयू प्रशासन पर फर्जी पत्र जारी कर बीते बीस सालों से सीसीएस कानून के तहत सैकड़ों शिक्षकों के उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया था।
इसके बाद बीएचयू प्रशासन ने प्रो ओमशंकर के खिलाफ जांच शुरू किए जाने की प्रेस विज्ञप्ति जारी की। विज्ञप्ति में मार्च, 2014 में विश्वविद्यालय की छवि को नुक़सान पहुंचाने के मामले में प्रो. ओम शंकर के निलंबन की बात कही गई है। जबकि प्रो. ओम शंकर का कहना है कि जिस कानून के तहत मेरा निलंबन किया गया था। ऐसा कोई कानून अस्तित्व में है ही नहीं क्योंकि सीसीएस या सीसीए आचरण संबंधी नियम बीएचयू में लागू ही नहीं होता।
उन्होंने कहा कि मैंने बीएचयू में एम्स की मांग की 15 दिनों तक अनशन पर बैठा रहा जिससे एम्स जैसी सुविधाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने कहा कि कायाकल्प योजना के नाम पर धन की जबर्दस्त लूट हुई। अस्पताल की संपत्तियों का अवैध तरीके से निजीकरण किया गया। ओपीडी एवं जांच शुल्कों में मनमानी वृद्धि की गई। भ्रष्टाचारी वर्तमान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके गुप्ता पर कोई कार्रवाई नहीं हुई जब मैंने इन मुद्दों को उठाया तो जवाब में मुझे ही उत्पीड़ित किया गया।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक होने के नाते मेरा कर्तव्य सच के साथ खड़ा होना है। आगे की कार्यवाही के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मौजूदा कुलपति, कुल सचिव, उप कुलसचिव गण तथा भ्रामक सूचना जारी करने वाले एपीआरओ अगर सात दिनों के अन्दर अपने पदों से इस्तीफा देकर माफी नहीं मांगते तो इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाऊंगा।
(भास्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट।)